आज बात तेल, ताकत और तकरार की — यानी अमेरिका बनाम वेनेज़ुएला में छिड़ी जंग की। सवाल ये नहीं कि वेनेज़ुएला गिरा कैसे, सवाल ये है — अमेरिका को इससे क्या चाहिए? और क्या अब Venezuela अगला Iraq बन रहा है? खबर को विडिओ मे देखनी हो तो लिंक पर क्लिक करें – https://youtu.be/lmqAvixM9BA
दोस्तों, दो ऐसे देश जिनका आपस में कोई मुकाबला ही नहीं है। क्या अमेरिका — दुनिया का सबसे ताकतवर देश — और कहाँ वेनेज़ुएला —ताकतवर तो छोड़ो, बहुतों को तो इसका नाम भी नहीं पता। ये एकदम वही बात — कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली। Power, औकात, किसी भी चीज़

में दोनों की तुलना नहीं हो सकती। लेकिन वो अमेरिका है। अमेरिका सीधे हमला नहीं करता…वो पहले sanctions लगाता है। घुटनों पर लाता है और कमर तोड़ देता है। दोस्तों, दरअसल दुनिया में अगर किसी देश के पास सबसे बड़ा तेल भंडार है, तो वो वेनेज़ुएला है। मतलब साफ बात — वेनेज़ुएला का सबसे बड़ा हथियार है तेल,
जिस पर अमेरिका अपना कब्ज़ा चाहता था। क्योंकि ट्रम्प ये बहुत अच्छे से जानते हैं कि तेल का मतलब Power। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वेनेज़ुएला में निकोलस मादुरो की सरकार ऐसा होने नहीं दे रही थी। ये बात ट्रम्प को पची नहीं। और नतीजा — वेनेज़ुएला में देर रात हमला,
जब वहाँ की जनता सो रही थी। अंधेरे में अमेरिका हमला कर रहा था।
खैर, ये सब कुछ ऐसे शुरू नहीं हुआ। अमेरिका सीधे हमला नहीं करता…वो पहले sanctions लगाता है। और चूँकि वेनेज़ुएला के पास एकमात्र और सबसे बड़ा हथियार तेल है —वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, करीब 303 billion barrels, यानी वैश्विक तेल भंडार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा। तो अमेरिका ने तेल पर sanctions लगाना शुरू कर दिया। कहा — आप अपना तेल हमें या हमारे सिस्टम में नहीं बेच सकते। जब कुछ बेचा नहीं, तो सरकार के पास पैसा आया नहीं। Import रुक गया — खाना, दवा, fuel — सब महँगा। अब सोचिए — जिस देश के पास दुनिया का सबसे ज़्यादा तेल है… वहीं लोग भूख से मर रहे हैं। वेनेज़ुएला… तेल का समंदर…
लेकिन दुकानों में खाना नहीं, ATM में पैसा नहीं, और सड़कों पर सिर्फ गुस्सा। जब देश के पास बेचने को कुछ न बचे, तो देश अपने आप घुटने टेक देता है। आप सोच रहे होंगे — जब इतना तेल है, तो फिर इतने बुरे हालात क्यों? दरअसल, वेनेज़ुएला का ज़्यादातर तेल बहुत भारी और गाढ़ा है। यह वो तेल नहीं है जो ज़मीन से निकलते ही refinery में चला जाए। इस तेल को पहले पतला करना पड़ता है, खास chemicals मिलाने पड़ते हैं, और फिर उसे process करने में ज़्यादा खर्च आता है। मतलब काग़ज़ पर भंडार बहुत बड़ा दिखता है, लेकिन हकीकत में उसे पैसे में बदलना मुश्किल हो जाता है। इसके बाद अगर कुछ बचता है, तो वो टकराता है Dollar Control से।
दोस्तों, इसे ऐसे समझिए — दुनिया भर में जितना भी व्यापार होता है, लगभग dollar में होता है। यानी दुनिया का असली राजा — Dollar। और इतने sanctions के बाद
वेनेज़ुएला ने कोशिश की China–Russia के साथ deal करने की, यानी dollar छोड़ने की। लेकिन अमेरिका को ये बिल्कुल मंज़ूर नहीं था। क्योंकि जहाँ तेल, वहाँ अमेरिका। और जो dollar से बाहर गया, वो system से बाहर हो गया। पहले drugs और smuggling के आरोप लगाए गए, फिर सीधा आधी रात को घर में घुस गए। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को आधी रात को ही कब्ज़े में कर लिया। फिर बाकायदा photos भी जारी की गईं — “देखिए, हमला कर दिया, राष्ट्रपति को कब्ज़े में ले लिया।” वही ट्रम्प का स्टाइल। खैर, ये कोई पहली बार नहीं हुआ। सिर्फ Venezuela के साथ नहीं हुआ। Iraq भी इसी power politics का शिकार रहा। वहाँ तेल था,
लेकिन control अमेरिका के पास नहीं था। बहाना था — Weapons of Mass Destruction। हकीकत थी — वही oil control। नतीजा? देश तबाह, सरकार बदली,
और instability आज तक।
Libya — “अफ्रीका का सबसे अमीर देश।” लेकिन Gaddafi ने Dollar छोड़ने की बात की। NATO attack। Gaddafi गया। “एक strong leader गया, लेकिन मज़बूत देश नहीं बचा।”
Iran — वहाँ बम नहीं गिरे, लेकिन economy पर गिरे। दोस्तों, ये modern war है — जहाँ बम नहीं, bank accounts फटते हैं। यूक्रेन और ग़ाज़ा सब देख रहे हैं…
लेकिन अमेरिका की अगली चाल वेनेज़ुएला में है। क्या वेनेज़ुएला अगला Iraq बनेगा? या दुनिया इस बार कुछ सीखेगी?